मैं एक चलचित्र का खोया हुआ सा किरदार हूँ
मैं उस किरदार को एक दिन परदे पर देखता हूं
और फिर कुछ सौ दिनों तक
उस किरदार के सांचे से बाहर नहीं आता
मैं Jordan का टूटा हुआ दिल हूँ
मैं Veera की पक्की चाहत और कच्ची कोशिश हूँ
मैं Shiuli और Dan के बीच हुई अनकही बात हूँ
मैं Ved की कहानियों में छुपा सहायक किरदार हूँ
मैं Fidato की दोहरी जिंदगी का झूठ हूँ
मैं Yudi की अस्थिरता में एक–एक दिन जिंदगी जीने का वादा हूं
मैं Liesel की Book burning से चोरी की गई किताब हूँ
मैं beaurcracy नहीं, बल्कि Vikram की हार का सच हूँ
फिर एक नया चलचित्र परदे पर आया,
मैं उसमें सम्मोहित होकर नया-सा हो गया।
पिछले किरदार का कुछ अंश मुझमें बाकी रह गया,
मैं अब तक देखे सारे किरदारों का एक मेल हूँ।
कच्ची उम्र का विमोह कहे कि शायद अपना अंत भी
सोहनी-महिवाल, लैला-मजनूँ या हीर-रांझा की कहानी-सा होगा।
– – – – – – – खैर छोड़ो – – – – – –
अब तो इश्क़-मोहब्बत की दरकार की झलक ही बसर है |

