Selling Unnatural Suffering – Humans

Disclaimer: As usual, this post is also DEPRESSING. Read it only if you can endure the storm of uncomfortable emotions. Let's start the journey of Pity. Isn't it ironic that in a densely populated country of the world, in a densely populated city, living in between crowds, and people everywhere yet I feel lonely? I am… Continue reading Selling Unnatural Suffering – Humans

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A Scooter Girl

वही पत्तियां सुख कर साख से नीचे उतरी हैं वही रास्ते आज फिर पग में फिर से आएं हैं मौसम तो बहार खिला है पर दिल का न कोई द्वार खुला है राह अधूरी, बाह अधूरी, ख्वाइशों को पिंजरे में बंद फिर से वही आएं हैं तुमको देखता हूँ तो ख्याल आता है जैसे तुम्हारी… Continue reading A Scooter Girl

मैं बूढ़ा हो रहा हूँ

मैं बूढ़ा हो रहा हूँतजरुबा बढ़ रहा है औरगलतियों का पिटारा भीखुश करने से ज्यादाखुश रहने का वक़्त गवा चूका हूँ उम्र यूँ बीत रही हैदाढ़ी अब सफ़ेद हो रही हैबस एक आदत गलतियांकरने की छूट नहीं रही है l बार बार करता हूँकई बार नई नई गलतियाँ रोता हूँ मन को समझाता हूँजैसे तैसे… Continue reading मैं बूढ़ा हो रहा हूँ

It’s not about just being a Woman

कितनी ही बलायें सहती है ये नारीमाँ - पिता का घर - आँगन छोड़अनजान सी नगरी रहती है नारी | एक लड़की थी, उसे एक लड़के से मोहब्बत हो गयीसंकोच कर उसने माँ पिता को अपने मन का हाल बताया | एक भारतीय संस्कृति में अपने आप सेकिसी को चाहना जैसे गुनाह सा है |… Continue reading It’s not about just being a Woman