मैं एक चलचित्र का खोया हुआ सा किरदार हूँ
मैं उस किरदार को एक दिन परदे पर देखता हूं
और फिर कुछ सौ दिनों तक
उस किरदार के सांचे से बाहर नहीं आता
मैं Jordan का टूटा हुआ दिल हूँ
मैं Veera की पक्की चाहत और कच्ची कोशिश हूँ
मैं Shiuli और Dan के बीच हुई अनकही बात हूँ
मैं Ved की कहानियों में छुपा, सहायक किरदार हूँ
मैं Fidato की दोहरी जिंदगी का झूठ हूँ
मैं Yudi की अस्थिरता में
– – – एक–एक दिन जिंदगी जीने का वादा हूँ
मैं Book burning से चोरी की गई Liesel की किताब हूँ
मैं System का नहीं, बल्कि Vikram की हार का सच हूँ
या
मैं Jordan का दिल तोड़ने वाला समाज हूँ
मैं Veera की चाहत का खुनी दरिंदा हूँ
मैं Shiuli पर बरसा October का मौसम हूँ
मैं Ved को अधम में जकड़े रहने वाला सन्देह हूँ
मैं जलन-द्वेष से भरा Fidato के रास्ते का रोड़ा हूँ
मैं Yudi की अधूरी लिखी किताबों का ढेर हूँ
मैं Liesel को साक्षरता से दूर करने वाला Nazi हूँ
मैं वो System हूँ जो Vikram को हारने देता हूँ
फिर एक नया चलचित्र परदे पर आया,
मैं उसमें सम्मोहित होकर नया-सा हो गया ।
पिछले किरदार का कुछ अंश मुझमें बाकी रह गया,
मैं अब तक देखे सारे किरदारों का एक मेल हूँ ।
कच्ची उम्र का विमोह कहे कि शायद अपना अंत भी
सोहनी-महिवाल, लैला-मजनूँ या
हीर-रांझा की कहानी-सा होगा ।
तय यह नहीं है की उस कहानी का
मैं नायक बनूँगा या प्रतिपक्षी ।
Protagonist या Antagonist ?
– – – – – – – खैर छोड़ो – – – – – –
इस दौर में तो इश्क़-मोहब्बत की दरकार की
झलक ही बसर है |

