Extinction or New World

It has been more than 6 months since the first case of COVID 19 has been found in China. It is well known to us how this small, tiny virus has upheaval human lives. The pain this pandemic has caused been described in words by Gulzar poetically: https://www.youtube.com/watch?v=38Ba6bpqxhE We as human have hundreds of reasons… Continue reading Extinction or New World

मीरा, राधा और महाभारत

मीरा मर गयी, राधा मर गयी श्याम के आस देखते पूरी सतयुग ही बीत गयी | आकर्षक और हसमुख सूरत अज्ञान की आग में महाभारत मच गयी | देख धरोहर खून से सनी अर्जुन दुःख से भर जाता था मोह त्याग का पाठ पढ़ाकर वो अर्जुन को बहकाता था | ना समझाया, ना बतलाया, ना… Continue reading मीरा, राधा और महाभारत

मृगतृष्णा के मोह में

सरल साधारण जीवनी मेरी असमान्य है हर ख्याल मेरे जिंदगी में कम में है ख़ुशी जान पाये है आज अरमान मेरे निराला मन है मासूम से सपने क्लेश द्वेष है मन के अपने भेद भाव है घना अँधेरा समझ पाए न किसी के दिल को अहंकार से चूर है तन मन में बेसब्री है मृगतृष्णा… Continue reading मृगतृष्णा के मोह में

मोहल्ले का प्यार

मोहल्ले का प्यार झुठ मुठ की तकरार मासूम से सपने प्यारी सी नोकझोक दिल के अपने सुख - दुःख के साथी ज़िंदगी की मुसीबतों को हस - खेल के बिताती खुशियों की चाभी पड़ोस में होती थी विश्वास करना आसान था दर्द में हमदर्द बनना रिश्तों को सिर्फ नाम से न निभाना हमसफ़र बन के… Continue reading मोहल्ले का प्यार

ख़याली मन में

आंखे बंद कर उसे ढूंढूं सवालो में, जवाबो में उसे खोजूं दिलासा दे, ख़याल सा ऐसा मेरे है बँधे पाँव खोल मैं उडुं | रज़ा क्या तेरे इस ख्वाईश की एक आंधी बन आसमान को छु लूँ | नगर नही, गली नहीं कोई ठिकाना हो ऐसी राह पर है मुझे जाना सितारों में जो मोती… Continue reading ख़याली मन में

सच्चा और अच्छा इंसान

एक और एक दो बनाता  है या ग्यारह ? जिन्दगी में नफा ज्यादा या नुक्सान ? एक स्वाभिमान दीखता है , पर वो स्वाभिमान कब अभिमान में बदल जाता है , पता ही नहीं चलता | एक अच्छे आदमी की पहचान होती है उसके गुण , हमारे शास्त्रों  में भी पांच सद्गुण माने गए है… Continue reading सच्चा और अच्छा इंसान

धर्मनिरपेक्ष भारत

शब्द हिंदी ने दिए अल्फ़ाज़ उर्दू ने प्यार हिंदी ने दिया मोहब्बत उर्दू ने हम यूँ क्यों नहीं करते एक दूजे की खामियों को बयां कर उनके उपाय ढूंढे हम एक दूजे की अच्छाइयों को अपनाये हम क्यों विविधता को न अपनाये सीखे समझे खुद को विज्ञानं से अवगत कराएं हम क्यूँ बस बहाने ढूंढ़ते… Continue reading धर्मनिरपेक्ष भारत

मैं तुम्हारा मन बनना चाहता हूँ |

चंदा चकोरी सोना सा मुखड़ा आँखें है तेरी जीवन का टुकड़ा | हर एक बात है सयानी मंज़िल हर मेरी अधूरा सा सपना | खोई है रातें खाली ये दिन है नीली सी सुबह शाम घनी है | मधुर है आवाज़ संगीत सुनहरा तेरे आने के इंतज़ार में दिल को अपनों का है आसरा |… Continue reading मैं तुम्हारा मन बनना चाहता हूँ |

Essence of Time

Time, one thing which is distributed by nature to every species equally. One of the key elements of the progress of civilization as a whole is the utilisation of time. We think we waste most of the time in vain for unnecessary problems. Politics, social conflict, religion, survival, economy, these are some entities which force… Continue reading Essence of Time