ख़याली मन में

आंखे बंद कर उसे ढूंढूं सवालो में, जवाबो में उसे खोजूं दिलासा दे, ख़याल सा ऐसा मेरे है बँधे पाँव खोल मैं उडुं | रज़ा क्या तेरे इस ख्वाईश की एक आंधी बन आसमान को छु लूँ | नगर नही, गली नहीं कोई ठिकाना हो ऐसी राह पर है मुझे जाना सितारों में जो मोती… Continue reading ख़याली मन में

सच्चा और अच्छा इंसान

एक और एक दो बनाता  है या ग्यारह ? जिन्दगी में नफा ज्यादा या नुक्सान ? एक स्वाभिमान दीखता है , पर वो स्वाभिमान कब अभिमान में बदल जाता है , पता ही नहीं चलता | एक अच्छे आदमी की पहचान होती है उसके गुण , हमारे शास्त्रों  में भी पांच सद्गुण माने गए है… Continue reading सच्चा और अच्छा इंसान

धर्मनिरपेक्ष भारत

शब्द हिंदी ने दिए अल्फ़ाज़ उर्दू ने प्यार हिंदी ने दिया मोहब्बत उर्दू ने हम यूँ क्यों नहीं करते एक दूजे की खामियों को बयां कर उनके उपाय ढूंढे हम एक दूजे की अच्छाइयों को अपनाये हम क्यों विविधता को न अपनाये सीखे समझे खुद को विज्ञानं से अवगत कराएं हम क्यूँ बस बहाने ढूंढ़ते… Continue reading धर्मनिरपेक्ष भारत

मैं तुम्हारा मन बनना चाहता हूँ |

चंदा चकोरी सोना सा मुखड़ा आँखें है तेरी जीवन का टुकड़ा | हर एक बात है सयानी मंज़िल हर मेरी अधूरा सा सपना | खोई है रातें खाली ये दिन है नीली सी सुबह शाम घनी है | मधुर है आवाज़ संगीत सुनहरा तेरे आने के इंतज़ार में दिल को अपनों का है आसरा |… Continue reading मैं तुम्हारा मन बनना चाहता हूँ |

Essence of Time

Time, one thing which is distributed by nature to every species equally. One of the key elements of the progress of civilization as a whole is the utilisation of time. We think we waste most of the time in vain for unnecessary problems. Politics, social conflict, religion, survival, economy, these are some entities which force… Continue reading Essence of Time

आज़ादी दिवस – भारत और पाकिस्तान

बेवजह ताकत के जोश और जूनून में दुश्मन बन बैठे है... दोस्त होते तो इंसानियत में सतरंगी रंग भर देते | अज्ञान भीड़ ही तो राज-काज की एकमात्र ताकत है न विचार में उसके ज्ञान है, ना वाणी में मधुरता है | इक माचिस उसने तेरे सामने रख दी है जिज्ञासा की उत्सुकता में, उसे… Continue reading आज़ादी दिवस – भारत और पाकिस्तान