ऐ रंगरेज़ क्या घोला रंग तुमने इसमेंरंग से बेरंग हो गया तू तेरे सपनों के शहर मेंविष्व के सैलानी भूले भटकेतेरे आँगन आके सुकून पाते थे क्यूँ तू इनकी बातों में आकरअपनी विविधता की ताकत को कमज़ोरी बना बैठा | हिमशृंगों की हवाहिमालय की चोटीउसकी धुप सेउसकी हवा सेये हराभरा शहररौशन था तारे सितारों की… Continue reading घाटी – पहाड़ी के रंगरेज़
Author: avinamaurya
रंग-बिरंगा अहसास
जाने कितनी आँखें ख़ुशी से भरी थीजाने कितनी बातें लबों पे आकर रह गई थीएक ऊर्जा शरीर में सैलाब सी होकर भी शांत थीएक पल उसके आने की आहट में रुका हुआ था एक छवि तो रोज़ आँखों में देखता हूँ उसकीआज हकीकत में देख रहा था,सब शून्य सा होकर वक्त को समेट लिया था… Continue reading रंग-बिरंगा अहसास
मैं कौन हूं
मैं एक चलचित्र का खोया हुआ सा किरदार हूँ मैं उस किरदार को एक दिन परदे पर देखता हूंऔर फिर कुछ सौ दिनों तकउस किरदार के सांचे से बाहर नहीं आता मैं Jordan का टूटा हुआ दिल हूँ मैं Veera की पक्की चाहत और कच्ची कोशिश हूँ मैं Shiuli और Dan के बीच हुई अनकही बात हूँमैं… Continue reading मैं कौन हूं
राजा, प्रजा और पूंजीपति
एक खून उबाल भर रहा हैआहिस्ता आहिस्ता।एक जुनून सा इश्क़ दिल में उतर रहा हैआहिस्ता आहिस्ता।सच बोलना कितना आसान होता है ।किंतुपूंजीपतियों की बनावटी दुनियां मेंयह एक अपराध होता है। हर दिल प्यार का भूखा है, पूर्ण सत्य ही सबसे बड़ी पूजा है - नैसर्गिक सत्य, कोई कहानी नहीं ।जैसे विज्ञान सिर्फ तथ्य रखता है, कोई… Continue reading राजा, प्रजा और पूंजीपति
तमाशा
ये देश है साहब।सर्कस की तरह चलाओगे तो,जनता को भी तमाशा देखने की आदत लग जाती है।फिर तमाशा आप की भावनाओं का ही क्यों ना हो,तमाशे से भुख तो नहीं, पर मन खूब भरता है। बहुत खूब कहा था एक किरदार ने,अंग्रेज़ भारत पर इतने वर्षो तक शाषन कैसे कर पाए,ना भाषा आती था ,… Continue reading तमाशा
A Scooter Girl
वही पत्तियां सुख कर साख से नीचे उतरी हैं वही रास्ते आज फिर पग में फिर से आएं हैं मौसम तो बहार खिला है पर दिल का न कोई द्वार खुला है राह अधूरी, बाह अधूरी, ख्वाइशों को पिंजरे में बंद फिर से वही आएं हैं तुमको देखता हूँ तो ख्याल आता है जैसे तुम्हारी… Continue reading A Scooter Girl
The Lost Ones
I spent half of my time in school as a backbencher. Then I developed feelings for this girl, who was a class scholar and was obviously attractive. As a reprimanded child, I believed that attending school was a worthwhile endeavour. Here I am a grown-up and realizing that although the world does belong to the… Continue reading The Lost Ones
Careless Individual
The era of individualism - demands for more, is too independent, pride, because of which disconnected from each other. Interdependencies are in decline. Our societies demands more and work less. We have many unrecognized revolutionary people who are burning within. There are many who are not able to sleep well at night due to cursed… Continue reading Careless Individual
मैं बूढ़ा हो रहा हूँ
मैं बूढ़ा हो रहा हूँतजरुबा बढ़ रहा है औरगलतियों का पिटारा भीखुश करने से ज्यादाखुश रहने का वक़्त गवा चूका हूँ उम्र यूँ बीत रही हैदाढ़ी अब सफ़ेद हो रही हैबस एक आदत गलतियांकरने की छूट नहीं रही है l बार बार करता हूँकई बार नई नई गलतियाँ रोता हूँ मन को समझाता हूँजैसे तैसे… Continue reading मैं बूढ़ा हो रहा हूँ
It’s not about just being a Woman
कितनी ही बलायें सहती है ये नारीमाँ - पिता का घर - आँगन छोड़अनजान सी नगरी रहती है नारी | एक लड़की थी, उसे एक लड़के से मोहब्बत हो गयीसंकोच कर उसने माँ पिता को अपने मन का हाल बताया | एक भारतीय संस्कृति में अपने आप सेकिसी को चाहना जैसे गुनाह सा है |… Continue reading It’s not about just being a Woman
