In service of अडंबानी


As Karl Marx once said, the state and capitalists are NOT two independent entities under capitalism. The state becomes a tool for the bourgeoisie to exploit the proletariat. We are living in a reality where the state has literally become a puppet of oligarchic capitalists.

Everything happening around us is NOT governed, BUT controlled by capitalists for their greed. We are nothing but servants of our masters. The masters, who consider themselves a superior species, with the right to exploit any inferior species including जन, जंगल, ज़मीन .



As an honest servant of those two masters of India, I present few verses:

( १ ) नफ़रत और समाज

जो अपंजीकृत अवैध संघ को दान करे,
जो नेक विचारों को प्रदूषित करे,
जो जन-जन में नफ़रत के बीज बोए,
जो देश की एकता में फूट डाले

वही है अडंबानी


( २ ) शोषण और मानवता

जो छोटे उद्योगों को लाचार करे,
जो असहायों का जीना दुश्वार करे,
जो युवकों के भविष्य में अंधकार भरे,
जो मानवता का तिरस्कार करे

वही है अडंबानी


( ३ ) राष्ट्र और विश्वासघात

जो देश को अंदर से खोखला करे,
जिस थाली में खाए, उसी में छेद करे,
जो देश की विभिन्नता को कलंकित करे,
जो देश की धरोहर को छलनी कर दे

वही है अडंबानी


( ४ ) लालच और विनाश

जो देश की प्रकृति को तहस-नहस करे,
जो गद्दार, सैकड़ों दुश्मनों के बराबर हो,
जिसके शरीर में दिल नहीं, सिर्फ़ बेईमानी हो,
जो लाखों घर उजाड़कर अपना शीशमहल चमकाए

वही है अडंबानी


( ५ ) शिक्षा, धर्म और असमानता

जो गुरुओं की शिक्षा को दो कौड़ी का बोले,
जो नफ़रत का ज़हर देश में बोए,
जो दो मज़हबों को लड़ाकर अपना मुनाफ़ा गिने,
जो समाज में असमानता को बढ़ावा दे

वही है अडंबानी


( ६ ) अन्याय के संरक्षक

जो बलात्कारियों के लिए मंच बनाए
जो Prime time बहस से जनता को भटकाए
जो पैरवी – भ्रस्टाचार से दौलत कमाए
जब दौलत से कलम को जीत न पाए
तब जो ईमान पर हमले करवाये

वही है अडंबानी


कई जयचंद आए और गए।
उत्तम श्रेणी का है जिनका योगदान
जो अमर रहेगा
वही है अडंबानी

धन्य है हम, जो हम ग़ुलाम लोगों को अडंबानी की खिदमत करने का अवसर मिला।

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