मैं बूढ़ा हो रहा हूँ

मैं बूढ़ा हो रहा हूँतजरुबा बढ़ रहा है औरगलतियों का पिटारा भीखुश करने से ज्यादाखुश रहने का वक़्त गवा चूका हूँ उम्र यूँ बीत रही हैदाढ़ी अब सफ़ेद हो रही हैबस एक आदत गलतियांकरने की छूट नहीं रही है l बार बार करता हूँकई बार नई नई गलतियाँ रोता हूँ मन को समझाता हूँजैसे तैसे… Continue reading मैं बूढ़ा हो रहा हूँ

It’s not about just being a Woman

कितनी ही बलायें सहती है ये नारीमाँ - पिता का घर - आँगन छोड़अनजान सी नगरी रहती है नारी | एक लड़की थी, उसे एक लड़के से मोहब्बत हो गयीसंकोच कर उसने माँ पिता को अपने मन का हाल बताया | एक भारतीय संस्कृति में अपने आप सेकिसी को चाहना जैसे गुनाह सा है |… Continue reading It’s not about just being a Woman

मीरा, राधा और महाभारत

मीरा मर गयी, राधा मर गयी श्याम के आस देखते पूरी सतयुग ही बीत गयी | आकर्षक और हसमुख सूरत अज्ञान की आग में महाभारत मच गयी | देख धरोहर खून से सनी अर्जुन दुःख से भर जाता था मोह त्याग का पाठ पढ़ाकर वो अर्जुन को बहकाता था | ना समझाया, ना बतलाया, ना… Continue reading मीरा, राधा और महाभारत