राजा, प्रजा और पूंजीपति

एक खून उबाल भर रहा हैआहिस्ता आहिस्ता।एक जुनून सा इश्क़ दिल में उतर रहा हैआहिस्ता आहिस्ता।सच बोलना कितना आसान होता है ।किंतुपूंजीपतियों की बनावटी दुनियां मेंयह एक अपराध होता है। हर दिल प्यार का भूखा है, पूर्ण सत्य ही सबसे बड़ी पूजा है - नैसर्गिक सत्य, कोई कहानी नहीं ।जैसे विज्ञान सिर्फ तथ्य रखता है, कोई… Continue reading राजा, प्रजा और पूंजीपति

तमाशा

ये देश है साहब।सर्कस की तरह चलाओगे तो,जनता को भी तमाशा देखने की आदत लग जाती है।फिर तमाशा आप की भावनाओं का ही क्यों ना हो,तमाशे से भुख तो नहीं, पर मन खूब भरता है। बहुत खूब कहा था एक किरदार ने,अंग्रेज़ भारत पर इतने वर्षो तक शाषन कैसे कर पाए,ना भाषा आती था ,… Continue reading तमाशा

A Scooter Girl

वही पत्तियां सुख कर साख से नीचे उतरी हैं वही रास्ते आज फिर पग में फिर से आएं हैं मौसम तो बहार खिला है पर दिल का न कोई द्वार खुला है राह अधूरी, बाह अधूरी, ख्वाइशों को पिंजरे में बंद फिर से वही आएं हैं तुमको देखता हूँ तो ख्याल आता है जैसे तुम्हारी… Continue reading A Scooter Girl

मैं बूढ़ा हो रहा हूँ

मैं बूढ़ा हो रहा हूँतजरुबा बढ़ रहा है औरगलतियों का पिटारा भीखुश करने से ज्यादाखुश रहने का वक़्त गवा चूका हूँ उम्र यूँ बीत रही हैदाढ़ी अब सफ़ेद हो रही हैबस एक आदत गलतियांकरने की छूट नहीं रही है l बार बार करता हूँकई बार नई नई गलतियाँ रोता हूँ मन को समझाता हूँजैसे तैसे… Continue reading मैं बूढ़ा हो रहा हूँ

It’s not about just being a Woman

कितनी ही बलायें सहती है ये नारीमाँ - पिता का घर - आँगन छोड़अनजान सी नगरी रहती है नारी | एक लड़की थी, उसे एक लड़के से मोहब्बत हो गयीसंकोच कर उसने माँ पिता को अपने मन का हाल बताया | एक भारतीय संस्कृति में अपने आप सेकिसी को चाहना जैसे गुनाह सा है |… Continue reading It’s not about just being a Woman